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धीमी ट्रेनों पर नहीं लगेगा सुपरफास्ट चार्ज, रेलवे के फैसले से किराए में कटौती
- Reporter 12
- 10 Apr, 2026
रेलवे ने 55 किमी/घंटा से कम रफ्तार वाली ट्रेनों से सुपरफास्ट चार्ज हटाने का फैसला लिया है। इस कदम से स्लीपर, एसी और जनरल कोच के यात्रियों को किराए में 5 से 12 प्रतिशत तक राहत मिलेगी।
पटना/आलम की खबर:भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब 55 किलोमीटर प्रति घंटे से कम औसत रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया जाएगा, जिससे यात्रियों को किराए में सीधा फायदा मिलेगा। इस निर्णय का असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से धीमी गति के बावजूद अधिक किराया देने को मजबूर थे।
रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद पूर्व मध्य रेलवे ने अपने वाणिज्य विभाग को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पटना जंक्शन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह फैसला खास मायने रखता है, क्योंकि इस रूट से गुजरने वाली कई ट्रेनों की औसत गति निर्धारित मानक से कम पाई गई थी, बावजूद इसके उन्हें सुपरफास्ट श्रेणी में रखा गया था।
रेलवे के नियमों के अनुसार किसी ट्रेन को सुपरफास्ट का दर्जा तभी दिया जाता है, जब उसकी औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक हो। लेकिन कई ट्रेनों की वास्तविक गति इस मानक से कम होने के बावजूद उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा था। अब इस विसंगति को दूर करने के लिए रेलवे ने यह कदम उठाया है।
इस फैसले के तहत यात्रियों को अलग-अलग श्रेणियों में किराए में राहत मिलेगी। स्लीपर कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को लगभग 30 रुपये तक की कमी देखने को मिलेगी, जबकि एसी-2 और एसी-3 श्रेणी में करीब 45 रुपये तक का फायदा होगा। एसी-1 में भी किराया कम होगा, हालांकि यह कमी प्रतिशत के हिसाब से थोड़ी कम होगी। वहीं जनरल कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को 15 रुपये तक की राहत मिलने की संभावना है, जो कुल किराए का 10 से 12 प्रतिशत तक हो सकती है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय केवल किराया घटाने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। लंबे समय से यह शिकायत सामने आ रही थी कि कई ट्रेनें कागजों में तो सुपरफास्ट हैं, लेकिन हकीकत में उनकी रफ्तार सामान्य मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों जैसी ही है। इससे यात्रियों में असंतोष बढ़ रहा था।
इस निर्णय के तहत जिन प्रमुख ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटाया गया है, उनमें विभूति एक्सप्रेस, उपासना एक्सप्रेस, कुंभ एक्सप्रेस और हिमगिरी एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों की औसत गति निर्धारित मानक से कम पाई गई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
हाल ही में संसद की एक समिति ने भी ट्रेनों की गति और उनकी श्रेणी को लेकर रेलवे बोर्ड के साथ समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में यह बात सामने आई कि कई प्रमुख रूटों, जैसे दिल्ली-हावड़ा और हावड़ा-देहरादून, पर चलने वाली ट्रेनों की वास्तविक गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके बावजूद यात्रियों से सुपरफास्ट शुल्क लिया जा रहा था।
इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने देशभर के सभी 17 जोनों में करीब 900 ट्रेनों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इस समीक्षा के बाद यह तय किया जाएगा कि किन ट्रेनों की गति बढ़ाई जा सकती है और किनसे सुपरफास्ट का दर्जा हटाना उचित होगा। रेलवे का लक्ष्य है कि या तो ट्रेनों की रफ्तार को मानक के अनुरूप किया जाए या फिर यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डाला जाए।
रेलवे के इस फैसले को यात्रियों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल किराए में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी रेलवे व्यवस्था पर और मजबूत होगा। आने वाले समय में इस तरह के और फैसले लिए जाने की संभावना है, जिससे रेल यात्रा को अधिक सुविधाजनक और किफायती बनाया जा सके।
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